Rajasthan High Court denies bail to doctor who drove car into hospital while intoxicated

Rajasthan High Court Denies Bail:- Rajasthan High Court has dismissed the use of bail for an alleged specialist who caused a mishap at the emergency clinic premises by crashing into general people/patients that remained there, causing the death in the act of an individual. and unnatural birth cycle of a pregnant woman.

Equity Kuldeep Mathur said that cases of speeding and driving in a plaster are expanding step by step and are major contributors to mishaps on the streets. While bail is allowed in such matters, the reality of the allegations must be considered, the court said.

Rajasthan High Court denies bail

The court said that the public authority specialist, charged with the honest conviction of providing treatment to weak patients, despite monitoring the ill impacts of the crashed driver, while intoxicated drove his vehicle on an exceptionally congested street inside the clinic. emergency, causing death. of an individual, the unnatural birth cycle of a pregnant woman, and injured 4-5 different people.

The defendant’s lawyer argued that the Rajasthan High Court denies bail. The doctor was falsely implicated in the case and that section 304 of the Indian Penal Code (IPC) did not apply during the bail hearing. It was argued that the event occurred when the specialist, after entering the clinic, failed to hold the vehicle when it ran over a speed brake. It was reported that due to the rush and traffic jam near the entrance of the clinic, the unfortunate accident occurred and people remained there.

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Rajasthan High Court denies bail

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Rajasthan High Court denies bail to doctor who drove car into hospital while intoxicated

राजस्थान हाईकोर्ट ने डॉक्टर की जमानत याचिका ख ारि ज कर दी, जिस पर आरोप है कि उसने अस्पताल परिसर में वहां खड़ी जनता/मरीजों को टक्कर मारकर दुर्घ टना का कारण ब ना दिया, जिसके परिणामस्वरूप एक व्य क्ति की मौके पर ह ी मौत हो गई और गर्भवती महिला का गर्भपात हो गया।

जस्टिस कुलदीप माथुर ने कहा कि तेज गति और नशे में गाड़ी चलाने की घटन ाएं द िन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं और सड़क दुर्घटनाओ ं में प ्रमुख योगदान देने वाले कारक हैं।

अदालत ने कहा,

ऐसे मामले में जमानत देते समय आरोपों की गंभीरत ा को ध ्यान में रखना होगा

अदालत ने कहा,

“ऐसी प्रकृति के मामलों की तुलना उन मामलों से नह ीं “

More information चलाने के दुष्प्रभावों से अवगत होने के बावजू द नशे की हालत में अस्पताल के अंदर अत्यधिक भीड़भ 4-5 अन्य व्यक् तियों को चोटे आईं।

जमानत पर सुनवाई के दौरान, आरोपी का प्रतिनिधित ्व कर ने वाले वकील ने तर्क दिया कि डॉक्टर को मामल े में झूठ 30 4 के तहत अपराध लागू नहीं है। यह तर्क दिया गया कि यह घटना तब हुई जब डॉक्टर अस ् पताल में प्रवेश करते समय स्पीड ब्रेकर पर जाते समय वाहन से नियंत्रण खो बैठे।

यह प्रस्तुत किया गया कि अस्पताल के गेट के पास भ ीड ़ और भीड़ के कारण, वहां खड़े लोगों के साथ दुर् भाग्यप ूर्ण टक्कर हुई।

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अदालत को यह भी बताया गया कि डॉक्टर अब सेवानिवृ त ्ति की उम्र के करीब है और चूंकि मामले की जांच प हले ही पूरी हो चुकी है, चालान भी पहले ही दायर किय ा जा चुक ा है और अपीलकर्ता से कोई वसूली नहीं की जा नी है। इसलिए अपीलकर्ता को सलाखों के पीछे रखकर कोई सा र्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

हालांकि, अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का पुरजो र व िरोध किया। इसमें नागौर के सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर ्ट का हवाला दिया गया, जिसमें डॉक्टर के शराब पीन े की पुष्ट ि हुई। यह तर्क दिया गया कि अस्पताल के गेट के पास भीड़ और भ ीड़ के कारण उसने कार पर नियंत्रण खो दिया, यह तर्क खारिज करने योग्य है।

अस्पताल के गेट के पास भीड़ और भीड़ के संबंध में तर्क को संबोधित करते हुए अदालत ने कहा कि इस स्त र पर इस पर विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि मामल े की सुनवाई अभी तक सक्षम आपराधिक अदालत में नहीं हुई है और शिक ायतकर्ता का बयान दर्ज नहीं किया गया।

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अदालत ने कहा,

“जमानत के लिए आवेदन खारिज कर दिया गया। यह स्पष्ट कर दिया गया कि ऊपर दर्ज निष्कर्ष और ट िप् पणियां जमानत आवेदन के फैसले के सीमित उद्दे श्यों के लिए हैं। “

हालांकि, अदालत ने डॉक्टर को शिकायतकर्ता और उस महि ला, जिसका कथित तौर पर दुर्घटना के कारण गर्भप ात हो गय ा, उसका बयान दर्ज करने के बाद नई जमानत या चिका दायर क रने की छूट भी दी।

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पीठ ने कहा,

ट्रायल कोर्ट को प्राथमिकता के आधार पर उनके बय ान दर् ज करने का निर्देश दिया जाता है।

केस टाइटल: योगेन्द्र सिंह बनाम राजस्थान राज्य और अ न्य एस.बी. Release date 51/2023

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Source: vtt.edu.vn

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